कैमूर की ख़ूबसूरत घाटी में स्थित अलौकिक है “तुतला भवानी मंदिर”

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रोहतास जिले के तिलौथू प्रखण्ड के रेड़िया गांव स्थित तुतला भवानी धाम की छटा निराली हैं। तुतला भवानी धाम की मां तुतलेश्वरी भवानी की प्रतिमा अति प्राचीन है।

इतिहासकार बुकानन अपने यात्रा में लिखते है कि यह प्रतिमा प्राचीन काल से ही प्रसिद्ध है। तुतला भवानी की दो प्रतिमाएं विराजमान है। एक पुरानी और खंडित प्रतिमा है जबकि दूसरी नई है। वहा आसपास देखने पर कई शिलालेख हैं। रोहतास के इतिहासकार डा. श्याम सुन्दर तिवारी के अनुसार पुराना शिलालेख शारदा लिपि में 8 वीं सदी का है, जो अपठित है। और इसके बाद का शिलालेख बारहवीं सदी के  खरवार के राजा धवलप्रताप देव ने स्थापित करवाया था है। 19 अप्रैल 1158 ई. में दुर्गा की दूसरी प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा के समय लिखा गया है।

दूसरी प्रतिमा की शिलालेख में राजा धवलप्रताप देव की पत्नी सुल्ही, भाई त्रिभुवन धवल देव, पुत्र बिक्रमध्वल देव, साहसध्वल देव तथा पांच पुत्रियों के साथ पूजा अर्चना के साथ प्राण प्रतिष्ठा करायी है। इसकी पुष्टि शिलालेख करता है। तुतला भवानी मंदिर पहाड़ी की घाटी में स्थित है। मंदिर के सटे पहाड़ी में कछुअर नदी बहती है। तुतला भवानी मंदिर के आसपास की प्राकृतिक छटा मनोरम है। तुतला अष्टभुजी भवानी की मूर्ति गड़वाल कालीन कला का सुंदर झलक है। माता का प्रतिमा देखने से पता चलता है कि दैत्य महिषासुर की गर्दन से निकल रहा है, जिसे देवी अपने दोनों हाथो से पकड़कर त्रिशूल से मार रही हैं।

धाम तक पहुंचने का रास्ता नहीं है। इस कारण कम लोग पहुंचते हैं। लोगों कहना है कि नवरात्र में काफी भीड़ रहती है। मार्ग का निर्माण होने पर धाम में सैलानियों के आने-जाने का सिलसिला शुरू हो सकता है।
यह मंदिर मनोवांछित फल प्राप्ति को लेकर प्रसिद्ध है। शारदीय नवरात्र की नवमी तथा श्रावण पूर्णिमा को रोहतास जिले के तिलौथू प्रखंड के कई गांवों के लोग पहले तुतलेश्वरी माता की पूजा अर्चना कर ही कुलदेवता की पूजा अर्चना करते हैं। श्रावण मास में पूरे माह मेला तथा नवरात्र में 9 दिनों के मेले का आयोजन होता है। यहां बकरे की बलि देने का रिवाज है।

किवदंती है कि मंदिर प्रांगण में नवरात्र की नवमी तिथि की मध्य रात्रि में परियों द्वारा नृत्य-गीत के साथ पूजा-अर्चना की जाती है। तुतलेश्वरी भवानी मंदिर के आसपास की प्राकृतिक छटा मनोरम है। महिषासुर मंर्दिनी की प्रतिमा तुतराही जल प्रपात के मध्य में स्थापित है। पूरे रोहतास व कैमूर जिले में इस प्रकार का अद्भुत जल प्रपात नहीं है।

मां तुतला भवानी मंदिर का निकटतम रेलवे स्टेशन डेहरी-ऑन-सोन है। वहीं निकटतम बस स्टैंड रामडिहरा आन-सोन है। यह बस स्टैण्ड एनएच-2 सी (डेहरी-यदुनाथपुर पथ) पर अवस्थित है। यहां से 5 किमी. पश्चिम कैमूर पहाड़ी की घाटी में जाना पड़ता है। इसके लिए ऑटो रिक्शा उपलब्ध है। मंदिर से 100 मीटर की दूरी तक सड़क बनी हुई है। रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम से मंदिर की दूरी 38 किमी. है।

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घुमन्तु

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