बिहार का लोकप्रिय मखाना है जादुई गुणों से भरपूर

By

मखाना तो आपने जरूर देखा होगा और कभी न कभी खाया भी होगा। लेकिन क्या आपको पता है की मखाना पोषक तत्वों से कितना भरपूर होता है ?
मखाना एक जलीय घास है जिसे कुरूपा अखरोट के नाम से भी जाना जाता है। मखाने देखने में तो गोल मटोल सूखे दिखाई देते है पर मखाने के फायदे कई औषधीय गुणों से भरपूर होते है। हमारे स्वास्थ्य को तंदरूस्त रखने में मदद करते है। भारत में यह नवरात्रों और अन्य अवसरों के दौरान तैयार किए जाने वाला एक लोकप्रिय ‘उपवास’पकवान है। जिसे हम सूखे मेवा के रूप में शामिल करते हैं। मखाना खाने से चेहरे में झुर्रियां नहीं पड़ती हैं और उम्र कम दिखती हैं। इसे रोजाना खाने से सेहत के अनगिनत लाभ होते हैं।

इसके बीजों में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेड, वसा, खनिज लवण, कैल्शियम एवं फास्फोरस के अतिरिक्त केरोटीन, लोह, निकोटिनिक अम्ल एवं विटामिन बी-1 भी पाया जाता है । एवं प्रति 100 ग्राम 1.4 मिलीग्राम लौह पदार्थ मौजूद होता है।

इसमें औषधीय गुण भी होता है। अधिकांशतः ताकत वाली दवाएं मखाने से ही बनायी जाती हैं। केवल मखाना दवा के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता, इसलिए इसे सहयोगी आयुर्वेदिक औषधि भी कहते हैं। इसमें एन्टी-ऑक्सीडेंट होने से यह श्वसन तंत्र, मूत्र-जननतंत्र में लाभप्रद है। यह ब्लड प्रेशर एवं कमर तथा घुटनों के दर्द को नियंत्रित करता है।

वहीं ये हम भी जानते हैं कि मखाने एक हल्का-फुल्का स्नैक्स है मखाने को हम सूखे मेवा के रूप में शामिल करते हैं। मखाना खाने से चेहरे में झुर्रियां नहीं पड़ती हैं और उम्र कम दिखती हैं। अगर इसे नियमित तौर पर सही तरीके से अपनी डाइट में शामिल किया जाए तो इसके अनेकों लाभ पाए जा सकते हैं।

आपको पतला दुबला और छरहरा भी दिखना है लेकिन साथ ही भूखे रहना भी आपके बस की बात नहीं है तो आपके लिए एक ऐसा मेवा है जिसे खाकर आप अपना वजन भी कम कर सकते हैं। वो मेवा है मखाना, मखाने के गुण एक नहीं कई हैं। व्रत के दिनों में खाए जाना वाला मखाना एक बेहद पौष्टिक और फायदेमंद ड्राई फ्रूट है जिसमें वसा बहुत कम होता है और ये जल्दी पेट को भरा होने का एहसास कराता है। तो जो लोग डायटिंग करते हैं उनके लिए मखाना एक कम कैलोरी वाला स्नैक्स बन सकता है जिसे भूख में कभी भी खाया जा सकता है वो भी वजन बढ़ाए बिना।

आप सुबह खाली पेट मखाने के चार दानों का सेवन करके शुगर से हमेशा के लिए निजात पा सकते है। इसके सेवन से शरीर में इंसुलिन बनने लगता है और शुगर की मात्रा कम हो जाती है। इनका सेवन कुछ दिनों तक लगातार करें। फिर धीरे-धीरे शुगर रोग भी खत्म हो जाता है।

मखाना केवल शुगर के मरीज के लिए ही नहीं बल्कि हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों में भी फायदेमंद है। इनके सेवन से दिल स्वस्थ रहता है और पाचन क्रिया भी दुरुस्त रहती है। फूल मखाने में मीठा बहुत कम होने के कारण यह स्प्लीन को डिटॉक्सीफाई करता है। किडनी को मजबूत बनाने और ब्लड को बेहतर रखने के लिए खानों का नियमित सेवन करें।औरतों में मासिक चक्र में गड़बड़ी के कारण आने वाली परेशानियों से छुटकारा पाने में भी मखाना मददगार है।

रात को सोते समय ताम्र के पात्र में जल भरकर रखें एवं प्रातः उठने पर उस जल को पियें पेट संबंधी सभी विकार दूर होंगे।
मखाने में प्रोटीन,एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन,कैल्शियम,मिनरल्स,न्यूट्रिशियंस और फास्फोरस जैसे तत्व पाए जाते हैं। यह तत्व शरीर के पोषण के लिए बहुत जरूरी है। मखाने में मौजूद प्रोटीन के कारण यह मसल्स बनाने और फिट रखने में मदद करता है।

कैसे तैयार किया जाता है मखाना ?

इसकी खेती बिहार के मिथिलांचल में ज्‍यादातर होती है जो कि देश की कुल मखाना खेती का लगभग 80 फीसदी भाग है। इसके पैदावार के लिए इसके बीज को जो कि सफेद और छोटे होते हैं उन्‍हें दिसंबर से जनवरी के बीच में ही तालाबों के अंदर बोआई किया जाता है और फिर अप्रैल के महीने में पौधों में फूल लगने लगते हैं। इसके बाद देखते ही देखते जून जुलाई के महीने में 24 से 48 घंटे तक पानी की सतह पर तैरते हैं और फिर नीचे जा बैठते हैं। इसके फल कांटेदार होते है। 1-2 महीने का समय कांटो को गलने में लग जाता है फिर सितंबर अक्टूबर महीने में पानी की निचली सतह से किसान उन्हें इकट्ठा करते हैं, फिर उन की प्रोसेसिंग का काम शुरू किया जाता है।

इसके बीज सफेद और छोटे होते हैं, दिसंबर से जनवरी के बीच मखाना के बीजों की बोआई तालाबों में होती है। अप्रैल के महीने में पौधों में फूल लगने लगते हैं।

इसके बाद इसकी अगली प्रक्रिया प्रारंभ की जाती है। इसके बीजों को सूरज की तेज धूप में सुखाया जाता है। इन पर ग्रेडिंग बीजों के आकार के अनुसार की जाती है। इसके बाद मखाना बन कर तैयार हो जाता है।

मखाने का सबसे बड़ा लाभ यह है की इसे उगाने के लिए खाद या कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं होता इसीलिए इसे आर्गेनिक भोजन भी कहा जाता है। मखाने को फोक्स्नट अथवा प्रिकली लिली भी कहते हैं। मखाना की खेती भारत के अलावा चीन, रूस, जापान और कोरिया में भी की जाती है।

 

You may also like

News

post-image
घुमन्तु

कैमूर की ख़ूबसूरत घाटी में स्थित अलौकिक है “तुतला भवानी मंदिर”

रोहतास जिले के तिलौथू प्रखण्ड के रेड़िया गांव स्थित तुतला भवानी धाम की छटा निराली हैं। तुतला भवानी धाम...
Read More
post-image
COVID-19 आज कल

बिहार में प्रतिदिन 20 हजार कोरोना टेस्ट का टारगेट, सीएम नीतीश ने अफसरों को सौंपा टास्क

बिहार में कोरोना का संक्रमण काफी तेजी से बढ़ रहा है. इन दिनों प्रतिदिन एक हजार से ज्यादा मामले...
Read More
post-image
आज कल

देश में पहली बार पटना AIIMS में 30 साल के युवक को दिया गया कोरोना वैक्सीन का पहला डोज

बिहार समेत पूरे देश में रिकॉर्ड कोरोना मरीजों की पुष्टि हो रही है. प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग...
Read More